दिवाली मनाने के 15 तरीके

दिवाली उत्तर भारत के हिंदुओं के लिए साल के सबसे बड़े पर्वों में से है। रोशनी का यह त्योहार ढेर सारी खुशियाँ लेकर आता है। मोमबत्तियाँ, मिट्टी के दीये, मिठाइयों की महक से भरे हुए घर, परिवारों और दोस्तों की गर्मजोशी, और आने वाले सर्दियों के मौसम की ठंडक – दिवाली सच में उमंगों से भरा त्योहार है। देश के विभिन्न हिस्सों में दिवाली अलग-अलग तरह से मनाई जाती है।

1.ज़्यादातर घरों में करीब दिवाली 15 से 20 दिन पहले सफाई शुरू हो जाती है। इस दौरान घर के अलावा दुकान, ऑफिस, कारखानों आदि की सफाई का काम भी होता है।

2.नए कपड़ों की खरीददारी भी इस वक़्त खूब होती है। घर की सजावट का सामान, जिसमें पर्दे, चादर, दीवार हैंगिंग आदि शामिल होते हैं, भी दिवाली शॉपिंग का का अहम हिस्सा होते हैं।

3.इसके अलावा दिवाली वाले दिन पूजा सामाग्री, गणेशजी और लक्ष्मीजी की पूजा हेतु उनकी मूर्ति, मिठाई, नमकीन और सेव आदि की खरीददारी भी की जाती है।

4.दिवाली के 5 मुख्य दिन इस पर्व को और भी उत्तसहित बनाते हैं:

1 धनतेरस (भाग्य का दिन)

2. नरक चतुर्दशी (ज्ञान का दिन)

3. दिवाली (प्रकाश का दिन)

4. चतुर्नामक (नया साल)

5. भाई दूज (भाई-बहन के रिश्ते का दिन)

5.घरो को रंगोली और कंदिलों से सजाना भी दिवाली की एक अहम हिस्सा माना जाता है।

6.धनतेरस के दिन विशेष शॉपिंग की जाती है। धनतेरस के दिन लोग विशेष कर चाँदी के सिक्के, नई गाड़ी या गहनों की खरीद करते हैं। माना जाता है कि ऐसा करने से साल भर घर धन का आगमन होता रहता है।

7.दिवाली रोशनी का पर्व है और इस दिन सरसों तेल के दिया जलाने का रिवाज़ बरसों से चला आ रहा है। दीयों के अलावा आज के आधुनिक युग में लोग बल्ब, लाइट और तरह-तरह की रंग-बिरंगी रोशनियों से भी घर सजाते हैं।

8.इस दिन शाम को घर-घर में लक्ष्मी- गणेशजी की पूजा और उनसे सुख-समृद्धि की प्रार्थना की जाती है।

9.दिवाली का महत्व इस घटना से भी बढ़ जाता है कि कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी के दिन कृष्णजी ने नरकासुर का वध किया। तीनों लोकों पर आक्रमण करने वाले नरकासुर को भगवान कृष्ण ने दिवाली से एक दिन पहले हराया था। इस दिन को छोटी दिवाली के रूप में मनाया जाता है|

10.पटाखे, फूलझड़ी, आतिशबाज़ी आदि दिवाली का मुख्य आकर्षण है। बच्चे तो बच्चे, बड़े भी इसमें बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेते हैं।

11.दिवाली के दौरान खेले जाने वाले कुछ सबसे लोकप्रिय खेलों में ताश का खेल,म्यूजिकल चेयर आदि शामिल हैं।

12.वाराणसी में बड़ी संख्या में भक्त इस त्यौहार पर घाटों पर दीप जलाते हैं।

13.पश्चिम बंगाल और असम के लोग दीवाली की रात देवी काली की पूजा करते हैं और अपने पूर्वजों के लिए प्रार्थना करते हैं। बिहार और झारखंड के लोग शाम को लक्ष्मी पूजा करते हैं और महिलाएँ अपने घरों और मंदिरों के बरामदे में रंगोली बनाती हैं।

14.गुजरात में घर की दहलीज पर देवी लक्ष्मी के पैरों के निशान बनाए जाते  हैं; वहीं महाराष्ट्र को लोग अपने घरों में लक्ष्मी पूजा करते हैं और परिवारों और दोस्तों के लिए दावत का आयोजन करते हैं, जहां करंजी, लड्डू, चकली आदि सेव और मिठाइयाँ परोसी जाती हैं।

15.आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु के लोग भगवान कृष्ण और उनकी पत्नी सत्यभामा की पूजा करते हें क्योंकि सत्यभामा और श्रीकृष्ण ने राजा नरकासुर पर विजय प्राप्त की थी।

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Aaradhi

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