देवी दुर्गा के वाहन और उनका अर्थ

नौ-दिवसीय दुर्गा पूजा के दौरान देवी को नौ अलग-अलग रूपों में पूजा जाता है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, मां दुर्गा अपने परिवहन के तरीके को बदलती हैं; शेर के अलावा माँ के चार अन्य वाहन भी हैं, – हाथी, घोड़ा, नाव और पालकी।

कैसे होता है माँ के वाहन का चयन

देवी दुर्गा के आगमन और प्रस्थान का वाहन घट स्थापना (दुर्गा पूजा की शुरुआत) और विजयदशमी (दुर्गा विसर्जन) वाले दिन के आधार पर निर्धारित किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि अपने आगमन और विदाई के लिए देवी जो सवारी चुनती हैं उसी आधार पर इस बात का अनुमान लगाया जा सकता है कि आने वाला वर्ष देश-दुनिया के लिए कैसा होगा।

सप्ताह के जिस दिन घट स्थापना होती है, उससे देवी के आगमन का वाहन  और दसमी वाले दिन से विदाई का वाहन तय होता है।  

सप्ताह का हर एक दिन एक वाहन को समर्पित होता है। रविवार और सोमवार का दिन हाथी, मंगलवार और शनिवार घोड़े को, बुधवार नौका और बृहस्पनतिवार तथा शुक्रवार का दिन पालकी को समर्पित होता है।

हर साल देवी दुर्गा विभिन्न वाहनों पर आती हैं; हिन्दू मान्यताओं के अनुसार देवी का वाहन मानव जाति के लिए एक विशेष संदेश लेकर आता है।

देवी दुर्गा के वाहन से संबंधित एक अन्य धारणा यह भी है कि हर साल दो अलग-अलग वाहनों पर उनका आगमन और प्रस्थान होता है, लेकिन जब भी वे एक ही सवारी पर आगमन और प्रस्थान दोनों करती हैं, इसका अर्थ मानव-जाति के लिए विनाशकारी होता है। एक ही सवारी पर उनका आगमन और प्रस्थान उथल-पुथल, प्राकृतिक आपदाओं, युद्ध और सामाजिक अशांति को इंगित करता है, जिससे मानव जाति के बीच संकट पैदा होता है।

इस लेख में हम देवी दुर्गा के विभिन्न वाहनों का प्रतिकात्मक अर्थ बताने जा रहे हैं।

हाथी

यह शांति और समृद्धि को इंगित करता है, इसलिए यदि मां दुर्गा इस वाहन पर आती हैं या प्रस्थान करती हैं तो इसका मतलब है कि वे दुनिया को अपना आशीर्वाद दे रही हैं। हाथी पर माँ का आने का अर्थ है कि मानव जाति को अपनी कड़ी मेहनत का फल प्राप्त होगा और उसकी झोली खुशियों से भर जाएगी।

नाव

नाव पर माँ दुर्गा का आना या जाना बाढ़ और अच्छी फसल- दोनों को संकेत  करता है। नौके पर माँ का आना शुभ माना जाता है, लेकिन यह भी कहा जाता  है कि यह शुभता ज़्यादा देर के लिए नहीं होती है।  नौका पर आगमन जहाँ अच्छी फसल का द्योतक है, वहीँ यह अत्यधिक बारिश और बाढ़ की ओर भी संकेत करता है।

पालकी

पालकी चार लोगों द्वारा एक व्यक्ति को अपने काँधों पर ले जाने का प्रतिनिधित्व करता है। यहाँ इसका मतलब है एक महामारी का प्रकोप। माँ दुर्गा का इस वाहन से आगमन या प्रस्थान इस बात को दरसाता है कि मनुष्य के लिए महामारी एक बेहद कठिन दौर लेकर आएगी। इसके अलावा देवी की पालकी भूकंप की ओर भी इशारा करती है।

घोड़ा

माँ दुर्गा की सवारी के रूप में घोड़ा विनाश का प्रतिनिधित्व करता है। घोड़े पर माँ का आगमन या प्रस्थान अशुभता का संकेत है। घोड़े का उपयोग युद्ध में हुआ करता था, इसलिए ऐसा माना जाता है कि घोड़े पर देवी के आगमन या प्रस्थान से  युद्ध, हिंसा और दंगों का खतरा बढ़ जाता है।

Share
Aaradhi

Recent Posts

बंगाल की दुर्गा पूजा से संबन्धित कुछ अनूठी रिवाजें

बंगाल की दुर्गा पूजा पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। इस अवसर पर सुंदर मूर्तियों से सजे पंडालों में लाखों भक्तों…

6 days ago

कैसे मनाई जाती है बंगाल में दुर्गा पूजा

बंगाल  में मनाए जाने वाले सभी त्योहारों में से दुर्गा पुजा सबसे भव्य है। हालांकि माँ दुर्गा की पूजा भारत…

3 weeks ago

2020 में पितृ पक्ष की समाप्ती के बाद क्यों नवरात्रा शुरू नहीं हो रहे

आश्विन के महीने में देवी दुर्गा को समर्पित नवरात्रि का नौ दिवसीय त्योहार आमतौर पर पितृ पक्ष के समाप्त होने…

3 weeks ago

नवरात्रा का पर्व और देवी दुर्गा के नौ अवतार

नवरात्रों का त्योहार देवी दुर्गा और राक्षस महिषासुर के बीच हुई लड़ाई से जुड़ा है और बुराई पर अच्छाई की…

1 month ago

पुराणों के अनुसार भगवान विष्णु के 10 अवतार कौन से हैं

कहा जाता है कि भगवान विष्णु के असंख्य अवतार हुए हैं जिनमें से ऋषियों ने दस अवतारों को बाकी अवतारों…

1 month ago

नवरात्रि के नौ दिनों की तारीखें और उनसे संबन्धित ग्रह व रंग तथा नवरात्रि 2020 की तारीखें

सितंबर / अक्टूबर के महीने में मनाए जाने वाले नवरात्रों को शरद नवरात्रों के नाम से जाना जाता है। देश…

1 month ago

This website uses cookies.