2020 में पितृ पक्ष की समाप्ती के बाद क्यों नवरात्रा शुरू नहीं हो रहे

आश्विन के महीने में देवी दुर्गा को समर्पित नवरात्रि का नौ दिवसीय त्योहार आमतौर पर पितृ पक्ष के समाप्त होने के तुरंत बाद ही शुरू होता है। लेकिन इस साल, भक्तों को एक महीने तक शारदीय नवरात्रि मनाने के लिए इंतजार करना होगा। इस साल, पितृ पक्ष के बाद नवरात्रि की शुरुआत नहीं होगी।

इस असामान्य घटना का कारण क्या है, जानने के लिए यह लेख पढ़ें।
वशिष्ठ सिद्धान्त (वसिष्ठ के ग्रंथ) के अनुसार, पुरुषोत्तम मास या अतिरिक्त चंद्र मास हर 32 महीने, 16 दिन और 8 घटी के बाद होता है। (एक घटी लगभग 24 मिनट की होती है, इसलिए 8 घटी लगभग 3 घंटे की होती है।) इस संदर्भ में अधिक मास की अवधारणा पारंपरिक हिंदू चंद्र कैलेंडर के लिए अद्वितीय है। यह सौर और चंद्र वर्ष के बीच अंतर को समायोजित करने के लिए सबसे सटीक तरीकों में से एक है।
अतिरिक्त महीना या अधिक मास हर 32.5 महीने में औसतन पड़ता है। इसे पुरुषोत्तम मास के नाम से भी जाना जाता है, ऐसा कहा जाता है कि इस महीने को भगवान विष्णु ने अपना नाम दिया था। सौर वर्ष 365 दिनों और लगभग 6 घंटों से बना होता है, और चंद्र वर्ष 354 दिनों से बना होता है। इस प्रकार चंद्र और सौर वर्ष के बीच 11 दिन, 1 घंटा, 31 मिनट और 12 सेकंड का अंतर होता है।

एक हिंदू कैलेंडर वर्ष में बारह महीने होते हैं। लेकिन लगभग हर तीन वर्षों में एक बार, तेरहवें महीने को सौर कैलेंडर के साथ संरेखित करने के लिए चंद्र कैलेंडर में शामिल किया जाता है।
जब इस प्रकार का बदलाव होता है तब पुरुष मास को चंद्र कैलेंडर में जोड़ा जाता है। 2020 भी ऐसा ही एक वर्ष है जब एक अतिरिक्त महीने को चंद्र कैलेंडर में जोड़ा जाएगा और यह पुरुषोत्तम मास इस वर्ष आश्विन के महीने में पड़ेगा।
ज्योतिषियों का मानना है कि अधिक मास के कारण आश्विन माह की देरी 165 साल बाद हुई है। इसलिए, यह एक दुर्लभ घटना है। परिणामस्वरूप, चातुर्मास के लिए अब एक अतिरिक्त महीना होगा।
चातुर्मास में श्रवण, भाद्रपद, अश्विन और कार्तिक महीने शामिल हैं। चातुर्मास शुभ कार्यों जैसे कि गृहप्रवेश, मुंडन आदि के लिए आदर्श नहीं माना जाता है।

अधिक मास की महत्ता
अधिक मास के दौरान नेपाल के माचागांव में एक महीने का मेला मनाया जाता है। यह धारणा है कि मचनारायण मंदिर के तालाब में स्नान करके अपने पापों को धोया जा सकता है।

पुरुषोत्तम मास के दौरान लोग कई तरह के धार्मिक अनुष्ठान करते हैं जैसे कि व्रत रखना, धार्मिक शास्त्रों का पाठ, मंत्र, प्रार्थना, विभिन्न प्रकार की पूजा और हवन आदि।

महाराष्ट्र के बीड जिले में पुरुषोत्तमपुरी नाम का एक गाँव है जहाँ भगवान पुरुषोत्तम का मंदिर है। यह एक अनोखा मंदिर है, जो ईंटों से बना है और जो पानी पर तैरता है। प्रत्येक आधि मास में यहाँ बड़ा मेला लगता है और हजारों लोग भगवान पुरुषोत्तम का आशीर्वाद लेने के लिए विभिन्न स्थानों से आते हैं।

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