किन कारणों से है रामायण दुनिया भर में मशहूर

प्राचीन भारतीय महाकाव्य रामायण केवल हिंदू धर्म में ही नहीं बल्कि हिन्दी और संस्कृत साहित्य में भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह राजकुमार राम, जिन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम राम के नाम से भी जाना जाता है, के राक्षस राजा रावण पर विजय की कहानी है और नैतिकता व मर्यादा का पाठ सिखाती है।

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भूमि और इतिहास
24,000 से अधिक छंदों के साथ, रामायण हिंदू धर्म की सबसे लंबी कविताओं में से एक है  और इसी कारण इसे महाकाव्य का नाम दिया गया है। यद्यपि इसकी सटीक उत्पत्ति कब और कैसे हुई, यह ज्ञात नहीं है, तथापि कवि वाल्मीकि को आमतौर पर 5 वीं शताब्दी ईसा पूर्व में रामायण लिखने का श्रेय दिया जाता है।

संस्करण और अनुवाद
राम के वीर और रोमांचक कारनामों ने कई पीढ़ियों को प्रेरित किया है। बाल्मीकी रामायण के अलावा इस ग्रंथ के अन्य प्रसिद्ध संस्करणों में शामिल हैं:

  • गोस्वामी तुलसीदास द्वारा अवधी (पुरानी हिंदी) में श्री रामचरितमानस
  • तमिल में कंबन का कम्बरामायणम
  • मलयालम में पाताल रामायणम
  • कृतिवास ओझा द्वारा बंगाली रामायण

इस महा ग्रंथ का रंगनाथ (15 वीं शताब्दी), बलराम दास और नरहरि (16 वीं शताब्दी), प्रेमानंद (17 वीं शताब्दी) और  श्रीधरा (18 वीं शताब्दी) सहित लगभग सभी भारतीय कवियों और सभी भाषाओं के लेखकों पर गहरा प्रभाव पड़ा।

वाल्मीकि की रामायण को सर्वप्रथम 1843 में गैस्पेर गोरेसियो ने सार्दिनिया के राजा चार्ल्स अल्बर्ट के सहयोग से इतालवी में पश्चिम में पेश किया था।
दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण साहित्यिक कार्यों में से एक माने जाने वाली बाल्मीकी  रामायण का भारतीय उप-महाद्वीप की कला, संस्कृति, पारिवारिक ढांचे, राजनीति, राष्ट्रवाद और उग्रवाद पर गहरा प्रभाव पड़ा है। इस महाकाव्य का सार्वकालिक मूल्य सदियों से सराहा गया है  और हिंदू चरित्र को ढालने में इसकी अहम भूमिका रही है। हालाँकि, यह कहना गलत होगा कि रामायण केवल हिंदुओं की है।

दक्षिण पूर्व एशिया में रामायण

बहुत समय पहले, रामायण दक्षिण पूर्व एशिया में लोकप्रिय हो गई और मंदिर वास्तुकला और प्रदर्शन में विशेष रूप से जावा, सुमात्रा, बोर्नियो, इंडोनेशिया, थाईलैंड, कंबोडिया और मलेशिया जैसे देशों में प्रकट हुई। यह जाति, पंथ, रंग और धर्म की बेड़ियों को तोड़कर पूरी मानवता की अमूल्य धरोहर के रूप में स्वीकार्य हुई है क्योंकि यह सभी मनुष्यों के लिए आचार संहिता के रूप में सेवा करने में सक्षम है।
अंतर्राष्ट्रीय रामायण सम्मेलन
हर साल विभिन्न देशों के विद्वान अंतर्राष्ट्रीय रामायण सम्मेलन (आईआरसी) के लिए एकत्र होते हैं, जिसमें रामायण पर आधारित विभिन्न विषयों और कार्यशालाओं की प्रस्तुतियाँ शामिल होती हैं। आईआरसी तीन बार भारत में, दो बार थाईलैंड में और एक बार कनाडा, नेपाल, मॉरीशस, सूरीनाम, बेल्जियम, इंडोनेशिया, नीदरलैंड, चीन, त्रिनिदाद और टोबैगो और अमेरिका में आयोजित किया गया।

रामायण की अपरंपार लोकप्रियता
रामायण के पात्र और घटनाएं जनसाधारण को विचार और ज्ञान प्रदान करते हैं। यह कोई आश्चर्य नहीं है कि भारत के दो सबसे बड़े उत्सव – दशहरा और दिवाली – सीधे रामायण से प्रेरित हैं। पहला उत्सव रावण पर राम की जीत का स्मरण करवाता है तो दूसरा अयोध्या में राम और सीता की घर वापसी का।

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