क्यों भगवान हनुमान को संकट मोचन के रूप में जाना जाता है

पवनपुत्र हनुमान जी को संकट मोचन भी कहा जाता है। आइए, जानते हैं कि महाबली हनुमान के इस नाम के पीछे क्या कारण हैं।
‘संकट मोचन’ शब्द का अर्थ है कठिनाइयों का निवारण। ‘संकट मोचन’ शब्द भगवान हनुमान को संबोधित करने के लिए एक बेहद आदर्श नाम इसलिए है क्योंकि  उन्होंने रामायण के कई महत्वपूर्ण पात्रों की मदद की थी। भगवान राम सहित रामायण के अन्य पात्रों को जब भी किसी कठिनाई का सामना करना पड़ा, तो उन मुसीबतों से उबरने में हनुमानजी ने उनकी साहयता की। रामायण की निम्नलिखित घटनाएँ इस तथ्य को उजागर करती हैं।
रामायण की कहानी के नायक, श्री राम ने हनुमानजी के माध्यम से अपनी कई कठिनाइयों को पार किया। माता सीता को खोजने,  समुद्र के ऊपर पुल बनाने और रावण से लड़ने में श्रीराम ने  हनुमानजी की मदद ली। इन सभी अतिमानवीय कृत्यों ने राम को युद्ध जीतने और माता सीता को रावण की कैद से छुड़ाने में मदद की।
माता सीता रावण द्वारा कैद किए जाने पर लंका में बड़ी पीड़ा में अपने दिन बिता रही थीं। उनकी उम्मीदें दिन पर दिन कम होती जा रही थीं। इसी समय हनुमानजी  देवी सीता की खोज में लंका आए और उन्होंने माता सीता को अशोक वन में पाया। उन्होंने राम की अंगूठी प्रमाण के रूप में माँ सीता को दी और उन्हें आश्वासन दिया कि प्रभु राम बहुत जल्द उन्हें रावण की कैद से छुड़ा लेंगे।
जब युद्ध के दौरान लक्ष्मण बेहोश हो गए और संजीवनी बूटी की ज़रूरत पड़ी तो पवन-पुत्र तुरंत उसकी तलाश में उड़ गए। क्योंकि उन्हें जड़ी-बूटी की पहचान नहीं थी, इसलिए उन्होंने पूरी पहाड़ी को उखाड़ लिया और उसे युद्ध के मैदान में ले आए। जड़ी बूटी को पहाड़ी से एकत्र किया गया और लक्ष्मणजी को बचाने के लिए इस्तेमाल किया गया। इस प्रकार बजरंग बली ने लक्ष्मणजी को मृत्यु से बचाया।

हनुमान-को-संकट-मोचन-के-रूप-में-जाना-जाता-है

जब विभीषण रावण को छोड़कर राम की शरण में आए तब भगवान राम के शिविर में कोई भी उन पर विश्वास नहीं कर पा रहा था। यह केवल हनुमान थे जिन्होंने विभीषण के समर्थन में बात की और श्री राम ने उनकी बात को स्वीकार किया।
जब अहीरावण ने राम और लक्ष्मण को पकड़ लिया और उनके प्राणों की आहुती लेनी चाही , उस समय भी बजरंग बलि ने ही उस राक्षस के साथ लड़ाई की, उसे मारा और राम व लक्ष्मण को बचाकर ले आए।
जब ये सभी महान चरित्र कठिनाइयों में थे, तब हनुमानजी ने उन्हें मुसीबतों से बाहर निकाला और आज तक, वे भक्तों को परेशानियों से बचा रहे हैं और इसलिए उन्हें संकट मोचन कहा जाता है।

ऐसी मान्यता है कि हर दुख और पीड़ा का उपाय हनुमान जी के पास ज़रूर होता है। इस धरती पर ऐसा कोई संकट नहीं है, जिसे महावीर हनुमानजी समाप्त करने में असमर्थ हैं, इसलिए अगर आपके जीवन में बार-बार संकट आते हैं या कोई काम पूरा नहीं होता है, तो आपको हनुमान जी की पूजा व ध्यान करना चाहिए।

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