झापण मेला – सांप महोत्सव

झापण मेला पश्चिम-बंगाल के बांकुरा जिले के मनाया जाने वाला एक लोकप्रिय त्योहार है। यह बिष्णुपुर गांव, जो कोलकाता से लगभग 130 किलोमीटर दूर है, में श्रावण मास (जुलाई-अगस्त) के महीने में मनाया जाता है। यह पश्चिम बंगाल के प्रसिद्ध सर्प त्योहारों में से एक है, जो स्थानीय जनजाति निवासियों के बीच बड़े हर्षोलास के साथ मनाया जाता है। 
नागों की पूजा करने के लिए मनाया जाने वाला यह त्योहार, बिष्णुपूर की लोक-परंपरा से जुड़ा है और मुख्यत: यहाँ के आदिवासियों द्वारा मनाया जाता है। 
झापण मेला - सांप महोत्सव बिष्णुपुर पश्चिम बंगाल
कौन थी देवी मनसा 
ऐसा कहा जाता है कि यह त्योहार भगवान शिव की बेटी, देवी मनसा, जो सर्पों की देवी भी हैं, को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है। 
देवी मानसा के जन्म से जुड़ी एक विचित्र कथा यूं है- एक बार भगवान शिव के वीर्य ने सर्पों की मां,जिनका नाम काद्रू था, द्वारा बनाई गई एक मूर्ति को छू लिया जिस कारण मनसा का जन्म हुआ। इस घटना ने मनसा को शिव की बेटी के रूप में जन्म दिया लेकिन पार्वती की नहीं। एक अन्य मान्यता के अनुसार माँ मनसा ने भगवान शिव के प्राणों की उस वक़्त रक्षा की जब उन्होंने समंदर- मंथन के बाद विष-पान किया था। 
झापण मेला से जुड़ी स्थानीय परम्पराएँ और मान्यताएँ 
इस नाग त्यौहार में, महिलाएँ कठिन व्रत का पालन करती हैं और धार्मिक स्थलों या आसपास के मंदिरों में साँपों को दूध चढ़ाती हैं। मछवारे मनसा देवी की मिट्टी से बनी हुई मूर्ति को सांपों को जुलूस के साथ, पास की नदी में पारंपरिक स्नान के लिए ले जाते हैं। मंत्रों का गायन और पवित्र गीत गाते हुए माता मनसा को सर्प दंश और अन्य खतरनाक बीमारियों, जैसे चेचक आदि का इलाज करने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है।  
स्थानीय निवासी देवी मनसा की पूजा कर उनसे अच्छी वर्षा और भूमि की उर्वरता बढ़ाने की प्रार्थना भी करते हैं। चूंकि पश्चिम बंगाल एक कृषि आधारित राज्य है, इसलिए यह पर्व यहाँ लंबे समय से मनाया जा रहा है। यह उत्सव आने वाले फसल के मौसम के लिए शुभ माना जाता है। 
इस उत्सव को मनाने के लिए बहुत उत्साह और भक्ति के साथ एक आकर्षक मेले का आयोजन होता है। स्थानीय नाटकों के स्टेज शो और सांपों का प्रदर्शन इस उत्सव के प्रमुख आकर्षण बिन्दु हैं। स्थानीय सपेरे, जिन्हें झम्पनियों के नाम से जाना जाता है, इस दौरान सर्प-मेले में कई किस्म के सांपों और नागों जैसे- कोबरा,अजगर,वाइपर आदि का प्रदर्शन करते हैं।
चातुर्मासिया (बारिश के मौसम के पहले चार महीने) में, सांप, अन्य महीनों की तुलना में और ज्यादा जीवंत या खतरनाक हो जाते हैं। इसलिए इस सर्प उत्सव में सपेरों के प्रति सम्मान प्रकट करने की भी परंपरा है। पश्चिम-बंगाल के ये प्रमुख त्यौहार हर साल हजारों भक्तों और उत्साही प्रशंसकों को आकर्षित करता है। पर्यटकों के लिए भी झापण मेला विशेष आकर्षण का केंद्र रहता है। 

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