पाँच दिनों का त्योहार –दिवाली

दीपों के त्योहार को दक्षिणी भारत में दीपावली और देश के उत्तरी हिस्सों में दिवाली के रूप में जाना जाता है। दुनिया भर के हिंदुओं के लिए, यह उत्सव बुराई पर अच्छाई और अंधकार पर प्रकाश की जीत का प्रतीक है। यह सबसे महत्वपूर्ण हिंदू त्योहारों में से एक है।

पाँच-दिनों-का-त्योहार-–दिवाली


दिवाली की परंपराएं
दिवाली भगवान राम की वापसी का प्रतीक है, जो चौदह साल के वनवास के बाद अयोध्या लौटे थे।हिंदू कैलेंडर में कार्तिक के महीने में अमावस्या की रात को यह प्रकाशोत्सव मनाया जाता है।

भारत भर के मंदिरों को इस अवसर पर रंगीन माला और रोशनी से सजाया गया है। अपने घरों में लोग छोटे-छोटे तेल के दीये जलाते हैं। परिवार, मित्र और व्यापारिक सहयोगी उपहार और मिठाइयों का आदान-प्रदान करते हैं और पटाखों के धमाके से गली-मोहल्ले गूंज उठते हैं।

दीवाली केवल हिंदू धर्म में ही नहीं बल्कि सिक्ख धर्म में भी महत्व रखती है। इस दिन सिक्ख अपने छठे गुरु हरगोबिंदजी की रिहाई का जश्न मनाते हैं। सिक्खों  द्वारा इसे बांदी छोर दिवस के रूप में जाना जाता है। जैन इसे उस दिन के रूप में मनाते हैं जब भगवान महावीर निर्वाण या मोक्ष प्राप्त करते हैं।

दिवाली के पांच दिन

दिवाली एक पांच दिवसीय त्यौहार है जो धनतेरस से शुरू होकर भाई-दूज तक चलता है :


धनतेरस
धनतेरस पर दिवाली के पांच दिवसीय उत्सव की शुरुआत होती है। इस दिन, लोगों अपने घरों को साफ कर धन और समृद्धि की देवी लक्ष्मी के स्वागत के लिए तैयार करते हैं, जिनकी पूजा शाम को की जाती है। यह महंगा सामान, सोना चांदी, गाड़ी, बर्तन आदि खरीदने के लिए एक भाग्यशाली दिन माना जाता है।


नरक चतुर्दशी
हिंदू कथाओं के अनुसार, इस दिन भगवान कृष्ण द्वारा राक्षस नरकासुर का वध किया गया था। भारत के कुछ क्षेत्रों में इस दिन लोग जल्दी उठकर नहाते हैं और साफ या नए कपड़े पहनते हैं। दक्षिणी भारत के कुछ हिस्सों में इस दिन को दीपावली के मुख्य दिन के रूप में मनाया जाता है।


दिवाली
तीसरा दिन कार्तिक की अमावस्या को मनाया जाता है। भारत के अधिकांश हिस्सों में, यह त्योहार का सबसे महत्वपूर्ण दिन है और भारत के कई क्षेत्रों में वर्ष का अंतिम दिन है। इस दिन, भगवान राम, सीता और लक्ष्मण के साथ राक्षस रावण वध कर लंबे वनवास के बाद घर लौट आए थे। उसकी जीत का जश्न मनाने के लिए शाम के समय हर घर में दिये जलाए जाते हैं और शहर के शहर रोशनी से नहा उठते हैं। शाम को लक्ष्मी-गणेश का पूजन, आतिशबाज़ी और विशेष भोजन के साथ त्योहार सम्पन्न होता है।


गोवर्धन पूजा
दीपावली का चौथा दिन विक्रम संवत कैलेंडर में नए साल का पहला दिन भी होता है और इसे प्रतिपदा, गोवर्धन पूजा या अन्नकूट के नाम से भी जाना जा सकता है। अन्नकूट का अर्थ है ‘भोजन का पहाड़’। पौराणिक कथाओं के अनुसार इस दिन भगवान कृष्ण ने स्थानीय ग्रामीणों को मूसलाधार बारिश से आश्रय देने के लिए गोवर्धन पहाड़ी को उठा लिया था। इस दिन मंदिरों में श्री कृष्ण को कृतज्ञता के प्रतीक के रूप में विशेष प्रसाद चढ़ाया जाता है।

भाई दूज
यह दिवाली त्योहार का पांचवा और अंतिम दिन है। यह दिन भाई और बहन के बीच के रिश्ते का जश्न मनाता है।

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