भगवान कृष्ण के बारे में कुछ ऐसे रोचक तथ्य जो हर हिंदू को पता होना चाहिए

भगवान विष्णु के आठवें अवतार के रूप में पूजे जाने वाले श्रीकृष्ण हिन्दू धर्म के सबसे लोकप्रिय देवताओं में से एक हैं। कई भक्ति पंथों का केंद्र-बिन्दु रहे कृष्ण, कई-कई कवियों, रचनाकारों और चित्रकारों के प्रेरणा-स्रोत रहे हैं और उनकी कला को प्रभावित किया है।

जहां बाल कृष्ण को उनकी शरारतों के लिए जाना जाता है, वहीं एक किशोर के रूप में उन्होंने कई चमत्कार किए और राक्षसों को मौत की नींद सुला दिया। अपने युवा रूप में, चरवाहे कृष्ण एक प्रेमी के रूप में प्रसिद्ध हो गए। कहा जाता है कि उनकी बांसुरी की आवाज सुनकर गोपियाँ सुध-बुध खो बैठती थीं और बंसी की धुन पर नृत्य करने लगती थीं।

भगवान-कृष्ण-के-बारे-में-कुछ-ऐसे-रोचक-तथ्य

युवा होने पर कृष्ण और उनके भाई बलराम दुष्ट कंस का वध करने के लिए मथुरा लौट आए। बाद में, राज्य को असुरक्षित पाते हुए, कृष्ण यादवों को काठियावाड़ के पश्चिमी तट पर ले गए और द्वारका में नया राज्य स्थापित किया।

भगवान कृष्ण के कुछ अन्य रोचक प्रसंग इस प्रकार हैं:

  1. श्री कृष्णाजी की 16,108 रानियाँ थीं जिनमें से आठ को पटरानी के रूप में भी जाना जाता है। इन आठ पटरानियों के नाम थे: रुक्मिणी, सत्यभामा, जाम्बवती, नागनजति, कालिंदी, मित्रविंदा, भद्रा, और लक्ष्मणा। अन्य 16,100 पत्नियाँ वो थीं जिन्हें नरकासुर नामक भयंकर असुर से बचाकर मुक्त किया गया था।
  2. कृष्णजी के 80 बेटे थे जो आठ रानियों से पैदा हुए थे, प्रत्येक रानी ने 10 बेटों को जन्म दिया। उनमें से सबसे प्रसिद्ध थे: प्रद्युम्न, जिन्होंने रुक्मिणी के पुत्र के रूप में जन्म लिया और रानी जांबवती के पुत्र सांब जो ऋषियों द्वारा शापित हो गए थे और इसी कारण आगे चलकर यदु वंश का नाश हुआ।
  3. सुभद्रा, कृष्ण की बहन, वासुदेव और रोहिणी की बेटी थीं। जब वासुदेव को जेल से मुक्त किया गया था तब उनका जन्म हुआ था। बलराम चाहते थे कि उनकी बहन सुभद्रा का विवाह दुर्योधन से हो, जो उनके पसंदीदा शिष्य थे। लेकिन कृष्ण ने अर्जुन को सुभद्रा का हरण करने की सलाह दी और सुभद्रा का विवाह अर्जुन से करवा दिया।
  4. जब कृष्णजी ने भगवद गीता सुनाई, तो गीता सिर्फ अर्जुन ने ही नहीं, बल्कि हनुमान और संजय ने भी सुनी। कुरुक्षेत्र की लड़ाई के दौरान, हनुमान अर्जुन के रथ के शीर्ष पर थे,और वेद व्यास ने संजय को दिव्य दृष्टि का आशीर्वाद दिया था जिससे संजय हस्तिनापुर में बैठे-बैठे ही सारा युद्ध देख पा रहे थे।
5.   एक समय कृष्ण ने अर्जुन के साथ युद्ध करना शुरू कर दिया और दोनों की लड़ाई रोकने के लिए स्वयं भगवान शिव को उतरना पड़ा। जब श्री कृष्ण से इसका कारण पूछा गया तो उन्होंने कहा वे अर्जुन की वीरता और युद्धकला की परीक्षा ले रहे थे। 

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