महाकवि गोस्वामी तुलसीदासजी की जीवनी

गोस्वामी तुलसीदासजी को भारत के सबसे महान कवियों में से एक माना जाता है। उन्हें महाकाव्य रामचरितमानस,जो कि रामायण का एक रूपांतर है, के लेखक के रूप में जाना जाता है। तुलसीदास की वास्तविक जीवनी का एक बड़ा हिस्सा किंवदंती के साथ इस कदर मिश्रित है, कि सत्य को पौराणिक कथाओं से अलग करना मुश्किल हो जाता है।

तुलसीदासजी का बचपन

ऐसा कहा जाता है कि तुलसीदासजी का जन्म बारह महीने गर्भ में रहने के बाद हुआ था, जन्म के समय उनके मुंह में सभी बत्तीस दांत थे, उनका स्वास्थ्य और रूप पांच साल के लड़के की तरह था, और वो जन्म के समय रोएँ नहीं थे। कहा जाता है कि उन्होंने जन्म लेते ही राम-राम बोलना शुरू कर दिया था, इसीलिए उनका नाम रामबोला रखा गया। अपने जन्म के समय की अशुभ घटनाओं के कारण उनके माता-पिता ने उनको त्याग दिया था। 
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चुनिया, जो तुलसीदास जी की नौकरानी मानी जाती है, उन्हें अपने गाँव हरिपुर में ले गई और साढ़े पाँच साल तक उनकी देखभाल की, जिसके बाद उसकी मृत्यु हो गई। इसके बाद वो जीवनोपार्जन के लिए घर-घर भीख मांगने लगे। 
पांच साल की उम्र में रामबोला को नरहरिदास नामक एक वैष्णव तपस्वी ने अपनी शरण में ले लिया और तुलसीदास का नाम दिया। तुलसीदासजी ने प्रयाग, अयोध्या और चित्रकूट के अलावा आसपास और दूर-दूर के स्थानों का भी भ्रमण किया तथा कई संतों और साधुओं से मुलाकात की और ध्यान किया।  
 सांसरिक पीड़ा और काव्य रचना की शुरुआत 
कुछ लोगों का मानना है कि तुलसीदासजी  का विवाह रत्नावली नामक एक ब्राह्मण-कन्या से हुआ था। एक बार जब उनकी पत्नी अपने पिता के घर चली गई, तब तुलसीदासजी उससे मिलने के लिए रात में यमुना नदी तैरकर पहुँच गए। यह देख रत्नावली ने उनसे क्रोधित होकर कहा कि जितना प्रेम वो उससे करते हैं, उतना यदि भगवान से करते तो उन्हें भगवान मिल जाते। पत्नी के तिरस्कार और इस घटना ने तुलसीदासजी का जीवन ही बदल दिया। 
तुलसीदास जी ने उसे तुरंत छोड़ दिया और पवित्र शहर प्रयाग के लिए रवाना हो गए। यहाँ, उन्होंने गृहस्थ जीवन को त्याग दिया और साधु बन गए। 
अमर कीर्तियाँ
विक्रम संवत 1631 में, तुलसीदास जी ने अयोध्या में रामचरितमानस की रचना शुरू की। उन्होंने दो साल, सात महीने और छब्बीस दिनों में इस महाकाव्य की रचना की और 1633 में यह कार्य पूरा किया। 
 रामायण के अलावा तुलसीदासजी की पांच प्रमुख कृतियों में शामिल हैं:
1.  दोहावली (1581)- दोहों का संग्रह
2.  साहित्य रत्न या रत्न रामायण (1608-1614)- काव्यशास्त्र का शाब्दिक संग्रह
3.  गीतावली- गीतों में रामायण का एक ब्रज प्रतिपादन 
4.  कृष्ण गीतावली या कृष्णावली- कृष्ण को गीतों का शाब्दिक संग्रह
5.  विनय पत्रिका- विनम्रता की याचिका, एक ब्रज का काम है जिसमें 279 श्लोक और भजन शामिल हैं। विनयपत्रिका को तुलसीदासजी की अंतिम रचनाओं के रूप में माना जाता है।
इन सबके अलावा गोस्वामी तुलसीदासजी के अन्य लोकप्रिय रचनाएँ इस प्रकार हैं: 
·        हनुमान चालीसा
·        संकटमोचन हनुमानाष्टक
·        हनुमान बाहुक और 
·        तुलसी सतसई
तुलसीदासजी को हनुमान चालीसा का संगीतकार भी माना जाता है। 
विक्रम संवत 1680 के श्रावण महीने में तुलसीदासजी ने अपना शरीर बनारस के अस्सी घाट पर त्याग दिया।

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