महाशिवरात्रि का महत्व

हिन्दू शास्त्रों के अनुसार, फाल्गुन माह में अंधेरे पखवाड़े के 14 वें दिन आने वाले शिवरात्रि पर्व पर भगवान शिव की पूजा-अर्चना उन्हें सबसे अधिक प्रसन्न करती है। यह तथ्य स्वयं भगवान शिव द्वारा उनकी पत्नी पार्वती को बताया गया, जब माता पार्वती ने उनसे पूछा कि उनके लिए किए गए अनुष्ठान में उन्हें सबसे अधिक प्रिय कौन-सा है।

महाशिवरात्रि का त्योहार भगवान शिव के लाखों भक्तों के लिए सबसे महत्वपूर्ण त्योहार है। इस त्योहार को हिंदू पौराणिक कथाओं में बहुत महत्व दिया गया है। यह कहा जाता है कि जो भक्त शिवरात्रि के शुभ दिन, भक्ति-भाव से, भगवान शिव की पूजा करता है वह पापों से मुक्त हो जाता है।  

ऐसा माना जाता है कि इस दिन भगवान शिव की भक्ति करने से भक्तों को पीछले सभी पाप कर्मों से मुक्ति मिलती है। भक्त  जन्म और मृत्यु के चक्र से मुक्त हो जाता है और मोक्ष को प्राप्त करता है। इस दिन भगवान शिव के भक्त सारा दिन उपवास रखते हैं और शहद, दूध, पानी आदि से शिव लिंग का अभिषेक करते हैं।

महिलाओं के लिए महाशिवरात्रि का महत्व

महिलाओं के लिए भी महाशिवरात्रि का महत्व कम नहीं है। वो भी इस दिन भोलेनाथ के लिए व्रत रखती हैं और उनकी पूजा करती हैं। ऐसी मान्यता है कि विवाहित महिलाएं यदि इस दिन भोलेनाथ की व्रत-पूजा आदि करें तो उन्हें लंबे और समृद्ध वैवाहिक जीवन की प्राप्ति होती है। अविवाहित महिलाएं इस दिन शिव-शंभू से पूजा-अर्चना द्वारा आदर्श पति के लिए प्रार्थना करती हैं। भगवान शिव को एक आदर्श पति माना जाता है और कहा जाता है कि उनकी पूजा से अविवाहित महिलाओं को अच्छे पति और सुखी, वैवाहिक जीवन की प्राप्ति होती है।

महाशिवरात्रि की रात जागते रहने का महत्व

महाशिवरात्रि गृहस्थ लोगों के अलावा उन लोगों के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण है जो आध्यात्मिक पथ पर हैं। जहां पारिवारिक लोगों के लिए महाशिवरात्रि भगवान शिव की शादी की सालगिरह के रूप में मनाई जाती है, वहीं योगिक परंपरा को मानने वालों के लिए यह रात आध्यात्मिक लक्ष्य साधने की रात है।

इस दिन रात भर जागृत रहकर बाबा भोलेनाथ का ध्यान और भजन-कीर्तन आदि करने की भी परंपरा है। रात में जागते रहना जागरूकता और आध्यात्मिक लक्ष्य प्राप्त करने का प्रतीक है।

महाशिवरात्रि वह दिन माना जाता है, जब आदियोगी शिव ने अपनी चेतना को भौतिक स्तर पर जागृत किया। तंत्र के अनुसार, चेतना के इस स्तर पर, कोई अनुभव नहीं होता है और मन को स्थानांतरित किया जाता है। ध्यानी ध्यान द्वारा समय, स्थान और कार्य को स्थानांतरित करता है। यह आत्मा के लिए सबसे महत्वपूर्ण रात है जब योगी निर्वाण की अवस्था को प्राप्त कर लेता है, जो अवस्था समाधि के पहले की अवस्था है।

Please follow and like us:

Add a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *