माँ दुर्गा के दस हथियारों की विशेषताएं

माँ दुर्गा असीमित शक्ति का प्रतीक हैं। माँ दुर्गा सर्वोच्च दिव्य ऊर्जा का एक रूप हैं, जो बुराई को नष्ट करने और दुनिया में सद्गुण और शांति को बहाल करने के लिए पृथ्वी पर अवतरित हुई थीं। देवी दुर्गा ने कई देवताओं की संयुक्त शक्तियों के साथ अवतार लिया था और उनके सभी हथियार उन्हें देवताओं से वरदान में प्राप्त हुए थे, जिससे वे सर्वशक्तिशाली ‘दुर्गतिनाशिनी’ बन गईं, जो सभी दुखों को दूर करती हैं।

माँ दुर्गा के दस हथियारों की विशेषताएं

देवी दुर्गा की दस भुजाएँ इस बात का प्रतीक हैं कि वे अपने भक्तों की रक्षा आठों दिशाओ के अलावा आकाश और पृथ्वी से भी करती हैं। माँ दुर्गा के दस हाथो में शंख, चक्र, कमल, तलवार, तीर, त्रिशूल, गदा, वज्र, फरसा और सर्प हैं। इन दस शक्तिशाली हथियारों के साथ वे, पशुओं के राजा, शेर पर विराजित रहती हैं।
माँ के दस हाथों में शोभित हथियारों की विशेषताएं इस प्रकार हैं :

  1. शंख – ॐ ’नाम की आदिकालीन ध्वनि का प्रतीक है जिसमें से पूरी सृष्टि का उदय हुआ था। इसे भगवान वरुण द्वारा देवी दुर्गा को उपहार में दिया गया था।
  2. सुदर्शन चक्र – यह दर्शाता है कि माँ दुर्गा सृष्टि का केंद्र हैं और सारा ब्रह्मांड उनके चारों ओर घूमता है। यह माँ शक्ति को भगवान विष्णु का एक उपहार था।
  3. कमल– कमल ब्रह्मा का प्रतीक है और ज्ञान का प्रतिनिधित्व करता है, साथ ही ज्ञान के माध्यम से मुक्ति भी मिलती है। दुर्गा की अनुकंपा मनुष्य को अपने सांसारिक बंधन से ऊपर उठने और मोक्ष प्राप्त करने में मदद करती है।
  4. तलवार– श्री गणेश द्वारा माँ को प्रदान की गयी, तलवार बुद्धि और ज्ञान का द्योतक है। तलवार इस बात का प्रतीक है कि मनुष्य को अपने भ्रम और अत्यधिक इच्छाओं से छुटकारा पाना चाहिए क्योंकि ये उसकी आत्मा को बांधते हैं और वास्तविक कर्तव्य को करने से रोकते हैं।
  5. धनुष और बाण – धनुष और तीर ऊर्जा के प्रतीक हैं। इन्हें वायु देव ने माँ को वरदान स्वरूप प्रदान किया था।
  6. त्रिशूल – त्रिशूल के तीन तीक्ष्ण किनारों का अर्थ है कि मनुष्य तीन गुणों से बना है, जिनका नाम है- तमस (निष्क्रियता और सुस्त प्रवृत्ति), राजस (अति सक्रियता और इच्छाएं) और सत्व (सकारात्मकता और पवित्रता)। भगवान शिव द्वारा उपहार में दिया गया त्रिशूल इस बात को दर्शाता है कि माँ दुर्गा की करुणा इन तीनों गुणों पर विजय पाने में मदद करती है।
  7. गदा – अग्नि देव द्वारा दी गयी, गदा मां दुर्गा के प्रति निष्ठा, प्रेम और भक्ति का प्रदर्शन करती है।
  8. वज्र – वज्र माँ को इंद्र का दिया हुआ उपहार है जो चरित्र, दृढ़ संकल्प और सर्वोच्च शक्ति का प्रतीक है।
  9. कुल्हाड़ी/फरसा – विश्वकर्मा की शक्तियों और बुराई का नाश करने का प्रतीक है। यह बुराई से लड़ाई के दौरान परिणामों से भयभीत न होने का संकेत देता है।
  10. साँप– माँ के दसवें हाथ में एक सांप होता है। यह चेतना और भगवान शिव की ऊर्जा का प्रतीक है। साँप, शुद्ध आनंद की अनुभूति के लिए, चेतना की निचली अवस्था से उच्चतर अवस्था की ओर जाने का संकेत देता है।

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