शनि को कैसे करे प्रसन्न

वैदिक ज्योतिष के अनुसार व्यक्ति के ग्रहों की स्थिति उसका भविष्य तय करती है। कुंडली के बाकी ग्रहों की तुलना में शनि को विशेष रूप से क्रूर और अशुभ माना जाता है। शनि का कुप्रभाव जब कुंडली में अधिक होता है तो लोगों को कई कठिनाइयों और दुखों का सामना करना पड़ता है। इस ग्रह के प्रभावों को दूर करना थोड़ा मुश्किल है, लेकिन नामुमकिन नहीं। यहाँ, हम शनि देव को प्रसन्न करने के कुछ आसान टिप्स दे रहे हैं, जो आपको काफी राहत दे सकते हैं।

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पिंजरे से पक्षी को मुक्त कर शनि देव को करें खुश

भगवान शनि को न्याय का देवता माना जाता है और वे किसी को भी उसके बुरे कर्मों की सज़ा दिये बिना नहीं छोड़ते हैं। इसलिए एक पक्षी को पिंजरे से मुक्त करने से शनि के कुप्रभाव कुछ हद तक कम हो सकते हैं।
शनिदेव को सरसों के तेल का स्नान करना पसंद है

शनिदेव को सरसों का तेल चढ़ाएं और उनसे आशीर्वाद लें। शनिवार को उनका दिन माना जाता है, इसलिए आप हर शनिवार उनके मंदिर जाने का नियम भी बना सकते हैं।
शनिवार के दिन उकी पूजा करें
शनि देव कर्म में विश्वास करते हैं। हमारे पिछले जन्म में किए गए बुरे कर्मों के कारण शनि का बुरा प्रभाव पड़ता है। इसे बेअसर करने के लिए उड़द की दाल, काला तिल, नीलम रत्न, काली गाय, भैंस, काला कंबल या लोहा ब्राह्मण को दान देना चाहिए। शनिवार को, शनि मंदिर में, गरीबों को घर पर बने दही चावल वितरित करें।

और भी बेहतर परिणामों के लिए आप इस दिन उपवास कर सकते हैं। आप 51 शनिवार को व्रत भी रख सकते हैं। शनि अमावस्या या शनि जयंती पर शनि की पूजा श्रद्धा से करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

रुद्राक्ष या नीलम धारण करें

शनि के कुप्रभावों से बचने के लिए नीलम धारण करें।  आप चाहे तो 14 मुखी या सात मुखी रुद्राक्ष पहन सकते हैं  या एक शनि माला पहनें जिसमें 36 सात मुखी और एक 14 मुखी रुद्राक्ष का मनका हो।
पीपल के पेड़ की पूजा करें

पीपल के पेड़ में भगवान विष्णु का निवास माना जाता है। इसकी पूजा करने से शनि के बुरे प्रभाव दूर होते हैं। शनिवार के दिन पीपल की जड़ों को पानी दें और पेड़ की सात बार परिक्रमा करें।

शनि पाठ और शनि यंत्र

ऐसा कहा जाता है कि शनि चालीसा का जाप करने से व्यक्ति को साढ़े सती की अवधि में धैर्य, विनम्रता और सहनशीलता का आशीर्वाद मिलता है।

इसके अलावा शनि यंत्र की पूजा साढ़े सती के दौरान व्यापार में सफलता और मानसिक व भावनात्मक शक्ति बढ़ाने के लिए अत्यंत लाभदायक मानी गयी है।
महामृत्युंजय मंत्र का जप
दिन की शुरुआत महामृत्युंजय मंत्र के जप से करें।  महामृत्युंजय मंत्र दुर्घटनाओं, अकाल मृत्यु, भय आदि से रक्षा करने के लिए जाना जाता है।

शनि देव की सच्चे मन से पूजा करने से स्वास्थ्य, पारिवारिक जीवन, धन और कार्य से संबंधित सभी समस्याओं को हल करने में मदद मिलती है।

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