श्रावण का महिना हिंदुओं के लिए इतना खास क्यों है

हिन्दू धर्म में श्रावण का महीना बड़ा खास होता है। यह माना जाता है कि सावन महीने में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से भक्तों को मोक्ष प्राप्त करने में मदद मिलती है और इसलिए, इस महीने, उन्हें प्रसन्न करने के लिए मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की जाती हैं। यह भी मान्यता है कि अविवाहित महिलाओं द्वारा इस महीने भगवान शिव की पूजा करने से उन्हें अच्छे जीवनसाथी कि प्राप्ति होती है। 
श्रावण-का-महिना
श्रावण का महीना भारत के पूरे उप-महाद्वीप के लिए बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगमन से भी जुड़ा है।
भगवान शिव का आशीर्वाद पाने के लिए कई भक्त इस महीने हर सोमवार व्रत करते हैं और शिवलिंग पर दूध, पानी और बेल के पत्ते अर्पित करते हैं। विशेष मंत्रों का जाप और रुद्राभिषेक की पूजा भी इस दौरान काफी आम है। आमतौर पर, सावन का महीना जुलाई और अगस्त में मनाया जाता है। 
सावन मास को पवित्र और शुभ क्यों माना जाता है ?
श्रावण मास की महत्ता जुड़ी है समुद्र मंथन की कथा से। कहते हैं कि अमृत पाने के लिए देवताओं और असुरों ने इसी पवित्र महीने में समुद्र मंथन शुरू किया। इस प्रक्रिया के दौरान समंदर से इतना भयंकर हलाहल (जहर) निकला कि सारे जीव-जंतु और पृथ्वी इसके प्रभाव से नष्ट होने लगे और प्राणी जीवन पर संकट आ गया। 
तब देवताओं और राक्षसों ने मिलकर इस संकट से रक्षा हेतु भगवान शिव से प्रार्थना की। तब भोलेनाथ ने सभी की प्रार्थना स्वीकार कर पृथ्वी की रक्षा हेतु विष को पी लिया और संसार को नष्ट होने से बचा लिया। महादेव ने हलाहल को अपने कंठ में धारण किया जिसके फलस्वरूप उनका कंठ नीला हो गया और तब से उन्हें नीलकंठ नाम से पुकारा जाने लगा। तब से भगवान शिव के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने के लिए उन्हें सावन मास में पूजा जाता है।
 देश के विभिन्न प्रदेशों में श्रावण के विभिन्न रूप 
श्रावण मास झारखंड के देवघर में एक प्रमुख त्योहार का समय है। इस समय हजारों तीर्थयात्री बिहार के सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर लगभग 100 किलोमीटर पैदल चलते हैं और उसे बैद्यनाथ धाम स्थित शिवलिंग पर अर्पित करते हैं। 
श्रावण वार्षिक कांवर यात्रा का समय भी है, शिव भक्तों की वार्षिक तीर्थयात्रा, जिसे कांवर यात्रा के रूप में जाना जाता है। यह यात्रा हरिद्वार,गौमुख और गंगोत्री से  पवित्र गंगाजल लाने के लिए की जाती है।
अवनि अवित्तम
केरल, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक और ओडिशा सहित भारत के दक्षिणी और मध्य भागों में,श्रावण पूर्णिमा के दिन ब्राह्मण समुदाय अवनी अविट्टम या उपकर्मा का अनुष्ठान करता है। इस अनुष्ठान के दौरान ब्राह्मण उपनयन संस्कार के साथ अपने उपनयन सूत्र को बदलते हैं और साथ ही ऋषियों को याद कर उनसे अपने मंगल की प्रार्थना करते हैं।
सावन के महीने में, नाग पंचमी, श्रावणी पूर्णिमा, वरलक्ष्मी व्रत, गोवत्स, रक्षा बंधन, कालिकावतार, पुत्रादिकादशी और ऋषि पंचमी जैसे कई अन्य त्योहार भी मनाए जाते हैं।
 

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